गाडरवारा,उर्दू शेरो-अदब में राष्ट्रीय चेतना पर विमर्श : ‘उर्दू शेरो-अदब में राष्ट्रीय चेतना’ विषय पर विमर्श के साथ क्षेत्रीय साहित्यकारों एवं शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं
Aditi News Team
Mon, Oct 5, 2026
गाडरवारा में सिलसिला के तहत उर्दू शेरो-अदब में राष्ट्रीय चेतना पर विमर्श
गाडरवारा।विगत दिवस मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद संस्कृति विभाग के तत्वावधान में ज़िला अदब गोशा, नरसिंहपुर की ओर से ‘सिलसिला व तलाश-ए-जौहर’ के तहत शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सभागार, गाडरवारा में साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘उर्दू शेरो-अदब में राष्ट्रीय चेतना’ विषय पर विमर्श के साथ क्षेत्रीय साहित्यकारों एवं शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। गोष्ठी की सदारत डाॅ ईदू शाह रहबर ने की और मुख्य अतिथि थे असलम माजिद, विशिष्ट अतिथि रहे प्रिसिंपल सतीश नाईक ,रंगकर्मी जगदीश नेमा और इज़हार जबलपुरी। मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने अपने संदेश में कहा कि गाडरवारा जैसे साहित्यप्रेमी अंचल में उर्दू भाषा और साहित्य का कार्यक्रम आयोजित होना तथा स्थानीय साहित्य प्रेमियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता प्रसन्नता का विषय है। ‘सिलसिला’ के माध्यम से अकादमी का उद्देश्य विभिन्न अंचलों के रचनाकारों को मंच देने के साथ साहित्य के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक समरसता और साझा सांस्कृतिक मूल्यों पर संवाद को बढ़ावा देना है।
ज़िला समन्वयक अनीस शाह ने कहा कि गाडरवारा और नरसिंहपुर अंचल साहित्यिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध हैं। ‘सिलसिला’ के माध्यम से स्थानीय रचनाकारों को अपनी रचनाएं प्रस्तुत करने का अवसर मिलना क्षेत्र के साहित्यप्रेमियों के लिए उत्साह का विषय है।
मुख्य वक्ता अजय तुलसी ने कहा कि उर्दू साहित्य ने सदैव देश, मानवता, प्रेम और राष्ट्रीय एकता के भावों को स्वर दिया है और आज भी राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
इस अवसर पर पेश गए कलाम से अनीस शाह अनीस ने हम तो पत्थर में भी अपना ढूंढ लेते हैं ख़ुदा क्यों हमें इंसान में इंसां नज़र आता नहीं,असलम माजिद जबलपुरी ने जो अपने आप से ख़ुश हैं मुहब्बत सबसे करते हैं ख़फ़ा जो ख़ुद से होते हैं वो नफ़रत सबसे करते है,ईदू शाह रहबर ने
यूं उछालो न खुराफात के पत्थर लोगो ज़द में आये न कहीं आपका भी सर लोगो
इज़हार जबलपुरी ने दिल ये कहता है के दिल कर दूँ हवाले तेरे, पर ये टूटेगा नहीं इसकी ज़मानत क्या है,
अरविंद सिंह कल्प ने
शर्मिंदगी नहीं है अदब से झुके हैं हम, फलदार जब से हो गए तब से झुके हैं हम,
धर्मेंद्र आज़ाद ने वो गुलाब है कि बबूल है, ये तो सोचना भी फ़ुज़ूल है,कि तमाम ऐबों के बाद भी वो क़ुबूल है तो क़ुबूल है,ज्योति श्रीवास्तव ने बचा लेगा वो तिनके के सहारे- ख़ुदा पर इतना इत्मीनान रखना,गफ़्फ़ार भारती वो रहमत हैं, वो बरकत हैं हमारे घर की ज़ीनत हैं अगर बेटी न हो घर में तो घर अच्छा नहीं लगता,योगेन्द्र सिंह ‘योगी’ने
तुम आईने में ही बस ताकते रहो सूरत, मैं अपने ऐब गरेबां में झाँक लेता हूँ,
लखन डेहरिया ने अगर ग़लत को ग़लत भी न बोल पाएं हम-क़लम को तोड़ दें, कठपुतलियां नचाएं,
डॉ. ए. के. सोनी ‘मौलिक' ने
ये ज़िंदगी का सफ़र कितने रूप है इसके , हर एक रूप में कितना जुदा-जुदा हूँ मैं,
ख़लील करेलवी ने बुलंद होते हैं उनके ही सर ज़माने में,अदब की राह में जो सर झुका के चलते हैं गौरव सिंह ने मैं हर इक मुफ़लिस के भी काम आ जाऊँ,सोच समझ कर ख़ुद को सस्ता रक्खा है । ब्रज बिहारी ने इश्क़ करना है तो रूह तक आइए
जिस्म तक ही ठहरने से क्या फायदा, सचिन नेमा ने
मुहब्बत से परहेज़ तुमको अगर है अधूरी रहेगी इबादत तुम्हारी, पोसराज मेहरा नेवो बहुत उलझे हुए निकले सभी,लग रहे थे लोग जो आसान से की शानदार प्रस्तुति दी गई । कार्यक्रम का संचालन व आभार नरसिंहपुर ज़िला समन्वयक अनीस शाह ने किया।
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
सिलसिला व तलाश-ए-जौहर