: जबलपुर,कलेक्टर पहुँचे विराट हॉस्पिस,कैंसर के मरीजों की सेवा को बताया अनुकरणीय.
Fri, Oct 7, 2022
जबलपुर,कलेक्टर पहुँचे विराट हॉस्पिस,कैंसर के मरीजों की सेवा को बताया अनुकरणीय.जबलपुर।कलेक्टर डॉ इलैयाराजा टी ने आज गुरुवार की शाम लम्हेटाघाट रोड गोपालपुर स्थित विराट हॉस्पिस पहुँचकर यहाँ कैंसर मरीजों की सेवा भाव से की जा रही देखभाल को अनुकरणीय बताया है । उन्होंने यहाँ रह रहे कैंसर मरीजों से बात भी की और उनके स्वस्थ्य जीवन की कामना की । इस मौके पर कलेक्टर के साथ विराट हॉस्पिस की संस्थापक साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी एवं मेडिकल डायरेक्टर डॉ अखिलेश गुमास्ता भी मौजूद थे । बता दें कि ब्रम्हर्षि बावरा मिशन द्वारा संचालित विराट हॉस्पिस की स्थापना साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी द्वारा अपने आधात्मिक गुरु ब्रम्हर्षि विश्वात्मा बावरा जी की प्रेरणा से की गई थी । इस संस्थान में ऐसे कैंसर मरीजों को रखा जाता है, डॉक्टर भी जिनके बचने की उम्मीद छोड़ देते हैं । आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति वाले इन मरीजों को जीवन के अंतिम दौर में यहाँ घर जैसा वातावरण उपलब्ध कराया जाता है । बीमारी से लड़ने के लिये उनके आत्मबल को बढाने उन्हें आध्यात्म से जोड़ा जाता है । सभी मरीज सुबह और शाम सामूहिक प्रार्थना में शामिल होते हैं । उनके मनोरंजन के लिये टीव्ही एवं इंडोर गेम्स की व्यवस्था भी यहां की गई है । विराट हॉस्पिस में रहने वाले कैंसर के मरीजों को नाश्ता और भोजन की व्यवस्था भी निःशुल्क है । विराट हॉस्पिस में कैंसर मरीजों का उपचार और उनकी देखभाल प्रशिक्षित नर्सिंग स्टॉफ द्वारा की जाती है ।
: गाडरवारा, नंदी रक्षक को सेवानिवृति पर दी विदाई
Thu, Oct 6, 2022
नंदी रक्षक को सेवानिवृति पर दी विदाई
गाडरवारा। गत दिवस स्थानीय शासकीय पशु चिकित्सालय में नंदी रक्षक के पद पर सेवाएं दे रहे राजेश कुमार यादव को शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त होने पर स्टाफ के सदस्यों ने शाल, श्रीफल एवं उपहार देकर विदाई दी। विदित ही कि श्री यादव ने 3 मार्च 1986 से शासकीय सेवा स्थानोय पशु चिकित्सालय से ही शुरू की थी। वह समय समय पर गौ सेवकों की सूचना पर सड़को पर घायल पशुओं का भी इलाज करते रहे है। उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है। सेवानिवृति कार्यकम में प्रभारी पशु चिकित्सालय डॉ एस के ब्रिजपुरिया, पूनम दोहरे, देवेंद्र पटैल , राजेन्द्र रघुवंशी, अंबर घारू, हरेन्द्र द्विवेदी, गौसेवक ओमप्रकाश कीर,राजकुमार धानक , दीनदयाल प्रजापति , दयोदय गौशाला से मनोज अवस्थी, अमित कहार आदि ने भी उपस्थित होकर श्री यादव को सेवानिवृति पर शुभकामनाएं दी।
: हर बार लिखूँगा ( जन कवि की कलम से ) पं.सुशील शर्मा
Thu, Oct 6, 2022
हर बार लिखूँगा
जन जन की जो आवाजें हैं,
एक नहीं सौ बार लिखूँगा।
नहीं डरूँगा नहीं बिकूँगा,
मैं ये सब हर बार लिखूँगा।
शब्द शलाका कहती मुझ से,
सरोकार जन जन के लिखना।
खा लेना दो सूखी रोटी,
जिंदा हो तो जिंदा दिखना।बेगारी की बात लिखूँगा,
मक्कारी की घात लिखूँगा।
रगड़ एड़ियाँ जो जिंदा है,
भूख भरी वो रात लिखूँगा।
फटी टाट पट्टी पर बैठे,
लाखों बच्चे भूखे प्यासे।
अंग्रेजी में पलते बढ़ते,
उनके प्यारे नए नवासे।पक्ष गर्व से बड़बोला है,
और विपक्ष खड़ा है अंधा।
आम आदमी गूँगा बहरा,
खूब चले वोटों का धंधा।
रेता सोने जैसी बिकती
रोती हैं नदियाँ बेचारी।
काटे जंगल नगर बनाए
गॉंवों में पसरी बेगारी।शिक्षा का व्यापार खुला है,
पढ़े लिखे सड़कों पर घूमें।
बिकें डिग्रियाँ रस्ते-रस्ते,
युवा नशे में डगमग झूमें।
भाषा का व्यवहार लिखूँगा,
समता का आधार लिखूँगा।
मेरी कलम लिखेगी जब भी,
शिक्षा का व्यापार लिखूँगा।है विकास के पथ पर भारत,
पर पहाड़ सी मुश्किल भारी।
जनसँख्या विस्फोट हो रहा,
डेढ़ अरब की संख्या सारी।
अपनों से अपने ही भागें ,
कोरोना ने रिश्ते लूटे।
लाशें लावारिश हो चीखें
संवेदन के धागे टूटे।बढ़ा दिखावा है समाज में,
मानव मन अशांत है भारी।
पर्यावरण मिटा कर मानव,
करे चाँद पर यान सवारी।
आज अकेला हुआ आदमी,
सूख रहे हैं रिश्ते नाते।
सत्य आज खूँटी पर लटका,
हँसते हम झूठों को गाते।हँसते मुँह पर काले मन हैं,
बिखरे बिखरे सारे तन हैं।
अहंकार के भवन सुनहरे,
स्वार्थ भरे सारे आसन हैं।
पर्वत जैसी पीर खड़ी है,
दर्द भरे हैं सारे मुखड़े।
कल तक जो सुख के सागर थे,
सुना रहे हैं अपने दुखड़े।कल तक जो अपने लगते थे,
दूर खड़े वो मुस्काते हैं।
रिश्तों की बंजर जमीन से,
कुछ काँटे पग छिद जाते हैं।
सीमा पर है खतरा भारी ,
पाकी चीनी घात लगाएँ।
अफगानी मिट्टी से हमको
तालीबानी भी धमकाएँ।कितने कब तक जुल्म करोगे,
फाँसी दे दो चाहे मारो।
गोली सीने में तुम भर दो,
सरे मौत के घाट उतारो।
लिखने से पहले जो सोचे ,
रिरयाता मैं कवि नहीं हूँ।
फूँक मारने पर बुझ जाए ,
मैं कागज का रवि नहीं हूँ।हँसी चुटकुले शृंगारों पर ,
मेरी कलम नहीं चलती है।
देश प्रेम जन जन की बातें ,
शब्द शलाका मन जलती है।
सच्चाई में रोज लिखूँगा ,
धमकाओ मत नहीं डरूँगा
मैं शब्दों का साधक सीधा ,
तिल तिल कर मैं नहीं मरूँगा।