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भाई अमित भटनागर की रिहाई केलिये आदिवासी महिलाये चिता पर लेटी : धोड़न डैम बना 'रणक्षेत्र', जलने को तैयार चिताओं पर लेटे मासूम बच्चे और आदिवासी महिलाएं

Aditi News Team

Tue, May 12, 2026

पूर्व आप नेता,जल,जंगल,जमीन/ आदिवासियों की अस्मिता बचाने संघर्षरत,

भाई अमित भटनागर की रिहाई केलिये आदिवासी महिलाये चिता पर लेटी

धोड़न डैम बना 'रणक्षेत्र', जलने को तैयार चिताओं पर लेटे मासूम बच्चे और आदिवासी महिलाएं

छतरपुर/पन्ना से दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना के केंद्र 'धोड़न डैम' पर आज प्रशासन की रूह तब कांप गई जब हजारों आदिवासियों ने वहां अपनी चिताएं सजा लीं। यह महज प्रदर्शन नहीं, बल्कि जल-जंगल-जमीन के लिए 'सामूहिक आत्मदाह' की चेतावनी है।

धोड़न डैम की जमीन पर मौत का तांडव या न्याय की गुहार?

आंदोलन के तीसरे दिन, प्रदर्शनकारी SP कार्यालय से कूच कर सीधे धोड़न डैम पहुंच गए हैं। यहाँ दर्जनों चिताएं सजाई गई हैं, जिन पर आदिवासी महिलाएं अपने दुधमुंहे बच्चों को लेकर लेट गई हैं। उनकी आंखों में आंसू नहीं, बल्कि प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश है।

प्रमुख घटनाक्रम:अब समझौता नहीं, सीधे कार्रवाई की मांग

चिताओं पर सत्याग्रह: सैकड़ों महिलाएं और किसान धोड़न डैम की उसी जमीन पर चिताओं पर लेटे हैं, जिसे उनसे छीना जा रहा है। उनका कहना है कि "प्रशासन हमें उजाड़ने से पहले इन्हीं चिताओं पर जला दे।"

अमित भटनागर की रिहाई की जिद: ग्रामीणों का एक ही नारा गूंज रहा है— "अमित भटनागर को रिहा करो, या हमें अग्नि के हवाले करो।"

प्रशासनिक सन्नाटा: इतनी बड़ी घटना के बावजूद उच्च अधिकारियों का मौके पर न पहुंचना आदिवासियों के गुस्से को और भड़का रहा है।

"हमारी कब्र पर बनेगी यह परियोजना"

आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं दिव्या अहिरवार ने चिताओं के पास से गरजते हुए कहा:

"यह सरकार बहरी हो चुकी है। धोड़न डैम की नीवं हमारे पूर्वजों की हड्डियों पर रखी जा रही है। अगर अमित भटनागर की रिहाई और विस्थापितों के हक की बात नहीं हुई, तो आज इन चिताओं से उठने वाला धुआं इस सरकार की विदाई का संकेत होगा।"

ग्राउंड जीरो के हालात

मौके पर हजारों की भीड़ मौजूद है। गांव-गांव से लोग पैदल चलकर धोड़न डैम पहुंच रहे हैं। पुलिस बल की तैनाती तो है, लेकिन आदिवासियों के 'बलिदान' वाले जज्बे के आगे प्रशासन बेबस नजर आ रहा है।

चेतावनी: पन्ना का यह संघर्ष अब केवल एक बांध का विरोध नहीं रहा, बल्कि आदिवासियों के अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। यदि जल्द ही संवाद नहीं हुआ, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।

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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

पन्ना पुलिस अधीक्षक

पन्ना जिला कलेक्टर

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