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: स्वास्थ्य,अनुशासन और सुरक्षा: सफल जीवन के तीन मूल स्तंभ, हेमन्त शर्मा, वाइस चेयरमैन सूर्या फाउंडेशन

Aditi News Team

Sun, Jun 8, 2025
स्वास्थ्य,अनुशासन और सुरक्षा: सफल जीवन के तीन मूल स्तंभ, हेमन्त शर्मा, वाइस चेयरमैन सूर्या फाउंडेशन श्री हेमन्त शर्मा ने व्यक्तित्व विकास शिविर में युवाओं को दिए जीवन प्रबंधन के प्रेरणादायक सूत्र सुसनेर।जनपद में श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा लोक पुण्यार्थ न्यास द्वारा संचालित श्री कामधेनु गुरुकुलम एवं सूर्या फाउंडेशन, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित व्यक्तित्व विकास शिविर का द्वितीय दिवस विशेष प्रेरणा और व्यवहारिक ज्ञान से परिपूर्ण रहा। सूर्या फाउंडेशन के वाइस चेयरमैन हेमन्त शर्मा ने शिविरार्थियों को संबोधित करते हुए जीवन के विविध पहलुओं पर सारगर्भित मार्गदर्शन दिया। अपने पहले सत्र में उन्होंने स्वस्थ जीवन के 7 मूलमंत्र बताए — शुद्ध वायु, स्वच्छ जल, कच्चा आहार, गुड़, दूध, दांतों की स्वच्छता और मुस्कान — और इनका मानव शरीर एवं मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव स्पष्ट किया। दूसरे सत्र में उन्होंने सेल्फ मैनेजमेंट (स्व-विनियोजन) की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सफलता केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि समय, सोच और दिनचर्या की व्यवस्थित योजना से प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि अनुशासन ही व्यवस्था का मूल है, और व्यक्ति जितना अधिक अपने जीवन में अनुशासित होगा, उतना ही स्पष्ट और सटीक उसकी दिशा होगी। शिविरार्थियों को उन्होंने कहानियों और उदाहरणों के माध्यम से जीवन की व्यवहारिक शिक्षाएं दीं। इसके अतिरिक्त, श्री शर्मा ने सुरक्षा विषय पर भी एक विशेष वर्कशॉप का आयोजन कराया, जिसमें सड़क सुरक्षा, घरेलू सुरक्षा एवं आसपास के वातावरण में सतर्कता और सजगता जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि सुरक्षा केवल बाहरी खतरे से बचाव नहीं, बल्कि आत्म-जागरूकता का हिस्सा है, जो हर युवा को जीवनभर अपनाना चाहिए। श्री शर्मा ने आगे बताया कि जीवन में सीखने का कार्य निरंतर चलते रहना चाहिए, ईश्वर द्वारा दिए गए जीवन में हर क्षण कुछ ना कुछ नया सीखने की प्रेरणा यूनान के दार्शनिक सुकरात के जीवन से जुडी घटना के माध्यम से बताई। उन्होंने जोर दिया कि शिविरार्थियों को अपने टारगेट को तय कर उसको प्राप्त करने के लिए पांडवों में अर्जुन से लेना चाहिए जिन्होंने एकाग्रता और लगन से अपने आपको उस समय का सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बनाया । उन्होंने बच्चों को बताया कि हमे किसी भी परिस्थिति में हार नहीं माननी चाहिए । हमारे देश के एक बेटी अरुणिमा सिंहा अपने पैर कट जाने के बाद भी कृत्रिम पैर से माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने वाली देश की पहली दिव्यांग महिला बनी । ऐसे जीवन चरित्रों से सीखकर अपने आपको बेहतर मनुष्य बनाने की शिक्षा आपने इस शिविर से लेनी है और गोमाता की छाया में, संस्कार, सेवा और नेतृत्व की शिक्षा से युवा शक्ति सशक्त बन रही है। यह शिविर एक जीवन-दृष्टि है — आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की। शिविर में भाग ले रहे 128 युवाओं ने इन सत्रों में गहरी रुचि दिखाई और सक्रिय भागीदारी के साथ आत्मविकास की दिशा में प्रेरणादायक कदम उठाए।

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