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: गाडरवारा, गूजर झिरिया में हुआ कवि सम्मेलन का आयोजन

Aditi News Team

Sun, Oct 2, 2022
गूजर झिरिया में हुआ कवि सम्मेलन का आयोजन गाडरवारा । गत रात्रि माँ रेवा सेवा भक्त मण्डल द्वारा ग्राम गूजर झिरिया में विराजित माता के दरबार में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया । सम्मेलन की शुरुआत पर समिति सदस्य पोषराज मेहरा ने सभी कवियों का स्वागत पुष्पाहार से किया एवं कवि सम्मेलन का आग़ाज़ माँ शारदे की आराधना से हुआ। सम्मेलन में क्षेत्रीय कवियों ने अपनी कविताओं से सैकड़ों श्रोताओं और साहित्य प्रेमियों को आनंदित किया। सम्मेलन में ग्राम कान्हरगाँव के कवि शिवम संघर्ष ने गाय पर बहुत मार्मिक रचना सुनाई। सिंहपुर छोटा के ब्रज विहारी विराट ने देश भक्ति पर अपनी रचनाएँ सुनाईं। हास्य के मिमिक्री आर्टिस्ट सुनील तन्हा ने- मेरी कलम की स्याही कभी खत्म न हो, खत्म हो जाऊं पर मेरे चर्चे खतम न हों जैसी रचनाओं से ग्रामीणों को लोटपोट कर दिया। हर्रई छिंदवाड़ा के कवि भोले नेमा ने अपने गीत ग़ज़लों से समा बाँधा। तेंदूखेड़ा के शिक्षक कवि शिवकुमार पाटकार शिवा ने अपनी सबरस कविताएं सुनाईं। तेंदूखेड़ा के ही वरिष्ठ ग़ज़लकार धर्मेंद्र आज़ाद ने ग़ज़ल- बात मुस्कान तक नहीं पहुँची,जान पहचान तक नहीं पहुँची, चाहने वाले ही ऐसे निकले, लाश शमशान तक नहीं पहुँची का वाचन किया। बरेली के युवा कवि गजेंद्र मेहरा ने भक्ति भाव से ओतप्रोत कविताओं का वाचन किया। सम्मेलन में गूजर झिरिया के नेपाल सिंह गुर्जर ने कविता के माध्यम से अपने अनुभव व्यक्त किये। तरुण अभ्यास ने बुन्देली कविता- जो का कर रय ,,,से श्रोताओं को गुदगुदाया। सालीचौका के कवि मुख्तयार ने भी काव्यपाठ किया। गूजर झिरिया के कवि पोषराज अकेला ने- नए नित जख्म देने की उसकी आदत नहीं जाती,अपनी भी और जीने की मगर चाहत नहीं जाती। जैसे शे'र पढ़कर श्रोताओं का आशीर्वाद हासिल किया। सम्मेलन में मलखान सिंह मेहरा ने सखी री में रण में जाऊँगी कविता पढ़कर देशभक्ति का माहौल बनाया। कवि सम्मेलन का सफल संचालन कर रहे युवा व्यंग्यकार विजय बेशर्म ने हम कलम की वन्दगी को ही करम कहने लगे के माध्यम से शमां बांधा। सम्मेलन के अंत आभार मलखान सिंह मेहरा द्वारा व्यक्त किया गया।

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