: कर्म के प्रति अपार श्रद्धा होना जरूरी--- स्वामी इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज
Wed, May 1, 2024
कर्म के प्रति अपार श्रद्धा होना जरूरी--- स्वामी इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज7 दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा का आयोजन प्रारंभगाडरवारा। नगर के बोदरी मार्ग स्थित शनि मंदिर के पास एनटीपीसी आडिटोरियम के सामने श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी श्री इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज के मुखारबिंद से 7 दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ बीते बुधवार से हो गया । भागवत कथा के पहले दिन सभी श्रद्धालुओ द्वारा भागवत भगवान की आरती का गायन किया गया । तदोपरांत कथावाचक स्वामी इंद्रदेव जी सरस्वती का जीवन परिचय एवं उनके द्वारा किए जा रहे धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों की जानकारी से श्रद्धालुओं को अवगत कराया गया। कथा के पहले दिन महामंडलेश्वर स्वामी इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज ने कहा कि कलश यात्रा में माताओं ने कलश रखकर भागीरथ का कार्य किया है। समुद्र मंथन के समय भी माता लक्ष्मी एवं धन्वंतरि भी कलश लेकर आये थे। अमृत वाले कलश पात्र को लेकर गरुड़ देव आकाश में उड़ गए थे जहां कलश की बूंद गिरी वहाँ आजकल कुंभ के मेले भरते हैं। स्वामी इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज ने कथा में श्रद्धा का महत्त्व बताते हुए कहा कि हम सभी की कर्म के प्रति अपार श्रद्धा होना चाहिए। यदि कर्म के प्रति श्रद्धा भरपूर होगी तो कर्म का फल जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा कि जीवन मे काम के प्रति श्रद्धा वाले जरूर सफल होते है। हमारी श्रद्धा से ज्ञान पैदा होता है एवं श्रद्धा सत्य और असत्य दोनों को धारण करती है। उन्होंने माता शबरी का उदाहरण देते हुए कहा कि शबरी की श्रद्धा गुरुजी व उनके वचनों पर थी । उनके गुरुजी कहते थे कि राम जरूर आएंगे और भगवान श्री राम शबरी की कुटिया में आये। स्वामी इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज ने कथा में आगे कहा कि हमारे अंदर श्रद्धा का अभाव एवं टोटकों का प्रभाव अधिक है। यदि भगवान के प्रति आपकीं श्रद्धा है तो आपको टोटकों की ओर नही जाना पड़ेगा। बुधवार को श्रीमद भागवत कथा के पहले दिन बड़ी संख्या मे धर्मप्रेमी श्रद्धालुओ की उपस्थिति रही। कथा में संगीतमय भजनों पर श्रद्धालु भगवान की भक्ति में जमकर नाच रहे है। आयोजक मंडल ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में प्रतिदिन श्रीमद भागवत कथा में उपस्थिति की अपील की है।
: मजदूर दिवस पर विशेष (मजदूर कहाँ होते हैं)
Wed, May 1, 2024
मजदूर कहाँ होते हैं(अतुकान्तिका) मजदूर होते ही कहाँ हैंहोतीं हैं उनकी।काम पाने की आशा भरी सुबह।पसीने से तरबतर दोपहरफटे थैले में एक किलो आटे भरी शाम।बच्चों के साथ रोटी बांटती रात। मजदूर बीमार नहीं होतेबुखार में भी सीमेंट से भरे तसले कोले आते हैं तीसरी मंजिल पर। मजदूरों का बचपन नहीं होताउनका बचपनठेकेदार की गालियों औरदुकान की झूठन साफकरते हुए निकल जाता है। मजदूरों की शादियाँ नहीं होतींबस चुन लेते हैं एक साथीजो काम करके कुछ पैसे कमाए। मजदूरों के पास मकान नहीं होते हैंबस एक छोटा घर होता हैजिसमें वो सिर्फ रात को बैठकर सुकून की एक रोटी खाते हैं। मजदूरों का कोई देश नहीं होता हैन राज्य होता है न कोई शहर।बस एक वोट होता हैजिसे वो लोग चुरा कर डरा कर ले लेते हैंजो भाग्य विधाता हैं। मजदूरों के पास सिर्फ सरलता होती है,स्वाभिमान होता है।जो उनके पास कुछ भीन होने से ज्यादा कीमती होता है। सुशील शर्मा
: यूपीएससी में चयनित पुलिस कर्मियों की पुत्रियों को डीजीपी ने किया सम्मानित
Wed, May 1, 2024
यूपीएससी में चयनित पुलिस कर्मियों की पुत्रियों को डीजीपी ने किया सम्मानितसिविल सर्विसेस 2023 (यूपीएससी) के हाल ही में घोषित परिणाम में सतना जिले में पदस्थ एसआई श्री विजय सिंह की पुत्री काजल सिंह और रायसेन (सांची) में एएसआई के पद पर पदस्थ श्री राजू यादव की पुत्री दिव्या यादव का यूपीएससी में चयन हुआ है। उनकी इस उपलब्धि पर मंगलवार को डीजीपी श्री सुधीर सक्सेना ने दोनों को सम्मानित किया। इस मौके पर काजल सिंह के पिता एसआई श्री विजय सिंह व माता श्रीमती मीरा सिंह और दिव्या यादव के पिता एएसआई श्री राजू यादव व माता श्रीमती कल्याणी यादव उपस्थित थीं। दिव्या यादव को IAS तथा काजल सिंह को IPS मिलने की संभावनाहै ।