: प्रेम-प्रसंग में बाधा बन रहे पति की पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर रची थी हत्या की साजिश,पन्ना पुलिस ने कोलकरहिया हत्या कांड किया खुलासा
Mon, May 12, 2025
रिपोर्टर कविता पांडे
प्रेम-प्रसंग में बाधा बन रहे पति की पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर रची थी हत्या की साजिश पन्ना पुलिस ने कोलकरहिया हत्या कांड किया खुलासा
पन्ना जिले के सिमरिया थाना अंतर्गत 2 दिन पहले हुए सनसनीखेज हत्याकांड का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। प्रेम में बाधा बन रहे अपने ही पति को पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर मौत के घाट उतारने की साजिश रची थी और प्रेमी ने उसे शराब पिलाकर घटना को अंजाम दिया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।आपको बतादें कि उक्त घटना की जानकारी जगत पाल सिंह थाना प्रभारी सिमरिया ने प्रदान करते हुए बताया कि पुलिस अधीक्षक पन्ना साई कृष्ण थोटा ने मामले का खुलासा करने के लिए एक पुलिस टीम का गठन किया था। बताया जा रहा है कि मृतक जितेंद्र पटेल का शव खेत में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का लग रहा था, लेकिन गहन पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। थाना प्रभारी सिमरिया ने बताया कि मृतक की पत्नी, का ओमकार पटेल नामक व्यक्ति के साथ प्रेम संबंध था। इन संबंधों में मृतक जितेंद्र पटेल बाधा बन रहा था, जिसके चलते दोनों ने मिलकर उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची। योजना के तहत, मृतक के खाते में फोन पे पर 500 रुपये डलवा कर शराब मंगवाई गई इसके बाद खेत में मृतक को शराब पिलाकर कुल्हाड़ी से गले में प्रहार करते हुए पत्थरों से सीने व चेहरे में मारपीट कर चोट पहुंचाकर स्वयं की शर्ट की बाहों का फंदा बनाकर जोर से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए गए कुल्हाड़ी, टी-शर्ट व पत्नी के मोबाइल को भी बरामद कर लिया है और आरोपियों के खिलाफ हत्या और साजिश रचने की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।
: बुद्ध पर दोहे
Mon, May 12, 2025
बुद्ध पर दोहे
शुद्धोधन के घर लिया, जन्म शाक्य कुल बुद्ध।
अल्प मातृ सुख ही मिला, जीवन राजस शुद्ध।नाम लुंबनी ग्राम का, गौतम उनका गौत्र।
सिद्धि प्राप्त जन्मे महा, शाक्य वंश के पौत्र।यशोधरा भामिनि प्रिया, राहुल शिशु नवजात।
जरा मरण दुख व्यथित मन, कष्ट भरी थी रात।पल छिन में त्यागा त्वरित, राजपाठ का मोह।
दिव्य ज्ञान की खोज में, घर परिवार विछोह।देवदत्त के तीर से, घायल था जब हंस।
प्राणदान उसको दिया, कर कर्तव्य प्रशंस।अनगिन जप तप लीन थे, नित आहार निरोध।
वैशाखी की पूर्णिमा, पाया सच्चा बोध।धम्म धर्म निर्माण कर, सिद्ध साध्य परिवेश।
सारनाथ में बैठ कर, दिया प्रथम उपदेश।अष्टांगिक के मार्ग का, लिया सत्य संकल्प।
पंचशील सिद्धांत में, बोधिसत्व परिकल्प।हिरणवती का शालवन, कुशीनगर की गोद।
महामोक्ष धारण किया, परिनिर्वाण प्रमोदभटके तब सिद्धार्थ थे, बैठ गए तो बुद्ध।
ख़ुद से ख़ुद लड़ते रहे, यह निर्णायक युद्ध।✒️सुशील शर्मा✒️
: भगवान नृसिंह जयंती पर दोहे, सुशील शर्मा
Sun, May 11, 2025
भगवान नृसिंह जयंती पर दोहे
सुशील शर्मा
गोधूलि की बेल थी, प्रकट भए प्रभु पाल।ना दिन था ना रात थी , टूटे सारे जाल। प्रकट भए प्रभु खम्भ से, अद्भुत रूप अनूप।सुर नर मुनि सब डर गए, देखा नरहरि रूप।। नरसिंहम का रूप धर, रखा भक्त सम्मान।हिरण्य बंधु को मार कर,हरा दुष्ट अभिमान। देख भक्ति प्रह्लाद की, दौड़े आए नाथ।शरणागत वत्सल प्रभु, चरणों में मम माथ।। केहरि मुख नर तनु धरे, दंत बने हथियार।असुरों का मर्दन किया, भक्तों के रखवार।। भक्तों के संकट हरन, पल में आए आप।नरसिंहम प्रभु रूप है,दर्शन कटते पाप।। नृसिंहम का अवतरण,, भक्ति भाव विस्तार।सकल हृदय मंगल जगे, मन के मिटें विकार।। असुरों का अभिमान हर, हरे सभी के पाप।श्री नरहरि की कृपा से, मिटे जगत का ताप।। गरज उठे नरसिंह प्रभु, गूँज दिशाएं घोर।नाश पापियों का हुआ, मिटा पाप का शोर।। नरसिंहम प्रभु जो जपे, संकट मिटे तुरंत।भय बाधा सब दूर हो, अंत मिलें भगवंत। ✒️सुशील शर्मा✒️