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12 घण्टे से अधिक काम करने के बाद भी पेट नहीं भर पा रहा : वंचित समूह की महिलाओं के हुनर को नहीं मिल रहा न्याय

Aditi News Team

Sun, Nov 2, 2025

वंचित समूह की महिलाओं के हुनर को नहीं मिल रहा न्याय : अजय खरे

12 घण्टे से अधिक काम करने के बाद भी पेट नहीं भर पा रहा

रीवा 2 नवंबर। मध्य प्रदेश के रीवा शहर के कोठी कंपाउंड स्थित ऐतिहासिक घंटाघर के आसपास बांस की टोकनी सूपा पंखा आदि बनाने का काम करने वाली महिलाएं खासतौर से शादी के मौसम में अपनी आजीविका के लिए सड़क किनारे बैठने को मजबूर हैं। सुबह 9 बजे से शाम को 7-8 बजे तक अपना सामान बेंचने के लिए इन्हें काफी परेशान होना पड़ता है। समता सम्पर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने बताया कि करीब दो-तीन किलोमीटर दूर रानी तालाब और नया तालाब क्षेत्र से आने वाली इन महिलाओं से नगर निगम के द्वारा साल भर का लगभग ₹800 का कर वसूला जाता है। जबकि वंचित समुदाय के लोगों से इस तरह की कोई वसूली नहीं होना चाहिए। इनके बैठने के लिए कोई जगह निश्चित नहीं है। व्यवस्था के नाम पर आए इन्हें नगर निगम का उड़न दस्ता आए दिन खदेड़ता रहता है। बांस का काम करने वाली ये महिलाएं बंसल समाज की हैं। इनके परंपरागत काम को लेकर सरकार की कोई मदद नहीं मिल रही है। बांस का सामान बनाना अपने आप में महत्वपूर्ण कलाकृति है। इसे बनाने में काफी समय लगता है। ना तो इनके समय की कोई कीमत है, ना ही कला की कोई इज्जत है। इन्हें कोई व्यापारिक लाभ नहीं मिलता बल्कि श्रम की कीमत मिल जाए यही बहुत है। श्री खरे ने कहा कि ये महिलाएं ग़रीब और वंचित समूह से हैं। अनुसूचित जाति का होने के कारण इस समाज के लोगों को कहने के लिए आरक्षण तो है लेकिन उसका लाभ अभी तक नहीं मिल पाया है। सरकारी नौकरी मिलना तो दूर, ठीक से पढ़ाई लिखाई भी नहीं हो पाई है। इनके पास जो हुनर है उसकी कद्र भी नहीं है। इनका सामान खरीदने के लिए काफी मोल भाव भी होता है। इन्हें अपने सामान की उचित कीमत नहीं मिल पाती है। मौसमी धंधा होने के कारण इन महिलाओं के पास आय का कोई नियमित साधन नहीं है। ये अपने काम और कलाकृति को विस्तार देना चाहती हैं लेकिन पूंजी के अभाव में काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। शाम को घर का चूल्हा जल जाए ,इनका सपना यही तक सीमित रह गया है। श्री खरे ने कहा कि लाड़ली बहना योजना से किसी परिवार का खर्च नहीं चल सकता है वह तो चुनावी चुग्गा है। 12 घण्टे से अधिक काम करने के बाद भी पेट नहीं भर पा रहा है। ये महिलाएं चाहती हैं कि सरकार उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनके हुनर को आजीविका का ठोस स्वरूप प्रदान करे।

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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

12 घण्टे से अधिक काम करने के बाद भी पेट नहीं भर पा रहा

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