: सुप्रभात सत्संग समिति गाडरवारा ने मनाया विश्व योग दिवस
Sat, Jun 22, 2024
सुप्रभात सत्संग समिति गाडरवारा ने मनाया विश्व योग दिवस
गाडरवारा।कृषि उपज मंडी ,बीज निगम कार्यालय के सामने कई वर्षों से संचालित सुप्रभात सत्संग समिति गाडरवारा के सदस्यों ने विश्व योग दिवस पर योग, प्राणायाम, का कार्यक्रम रखा ! योग प्राणायाम में भाग लेने वाले सदस्यों में राम शंकर तिवारी, संतोष कुमार शर्मा, दिनेश कुमार नामदेव, भगवान दास चौबे ,जीवन लाल माटोलिया, मदन लाल सोनी, प्रेम नारायण कौरव, सुखराम विश्वकर्मा, ओमकार सेन, गोठल यादव, महेश साहू ,कमलेश चौकसे आदि सदस्यों ने भाग लिया योग कार्यक्रम का संचालन समिति के अध्यक्ष एवं प्रशिक्षित योग शिक्षक राधेश्याम सराठे द्वारा किया गया ज्ञातव्य हो कि समिति द्वारा नौ ग्रह वाटिका ,एवं 27 नक्षत्र वाटिका बनाई गई है जिसकी पूजन अर्चन एवं परिक्रमा करने हेतु बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन इकट्ठे होते हैं!
: मध्य प्रदेश शासन में राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने धूमधाम से मनाया अपना जन्मदिन
Fri, Jun 21, 2024
जन्मदिन पर पूज्यजनों का आशीर्वाद और अपनों का स्नेह मिलना परम सौभाग्य है - राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल।
KamarRana
उदयपुरा/रायसेन_____ शुक्रवार को उदयपुरा से भाजपा विधायक और मध्यप्रदेश सरकार में स्वास्थ्य राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल का जन्मदिन था। सामान्यतः नागरिक अपने जन्मदिन को अनूठे अंदाज में मनाते हैं, लेकिन राज्यमंत्री पटेल ने अपना जन्मदिन धर्मकाज को समर्पित कर मनाया।
जन्मदिन पर वह पूरे दिन अपने क्षेत्र के मांगरोल पुलघाट स्थित नर्मदा मैया सेवा आश्रम में रहे। राज्यमंत्री ने सुबह पहले क्षेत्र के सभी ग्राम खेड़ापति और पुजारियों को सम्मानित कर उनका आशीर्वाद ग्रहण किया। जिसके पश्चात उन्होंने आश्रम में ही रहकर अपने क्षेत्र के नागरिकों की बधाई स्वीकारी। जहां एक ओर नरेन्द्र शिवाजी पटेल की लोकप्रियता के चलते आश्रम में दोप से देर शाम तक बधाई और शुभकामनाएँ देने वालों का सिलसिला लगातार जारी रहा।
वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर भी उनके जन्मदिन की धूम बरकरार रही। सोशल मीडिया पर श्री पटेल को मुख्यमंत्री मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, सहित कई मंत्रियों, विधायकों, पदाधिकारियों, नेताओं और शुभचिंतकों ने शुभकामनाएँ दीं।
सोशल मीडिया पर मिली शुभकामनाओं पर श्री पटेल अपने हरफनमौला अंदाज में आभार प्रकट करते नजर आए। ज्ञात हो कि विगत वर्ष भी श्री पटेल ने आश्रम में विप्रजनों और ग्रामजनों के साथ रहकर जन्मदिन मनाया था।
मीडिया से संवाद करते हुए राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि - अपना जन्मदिवस हर किसी के लिए विशेष दिन होता है। इस दिन को वह या तो परिवारजनों के साथ या मित्रों के साथ मनाता है। मेरा तो हर दिन अपने क्षेत्रवासियों के लिए समर्पित है, चाहे फिर वह विशेष हो या सामान्य। और एक जनप्रतिनिधि के नाते क्षेत्र की जनता मेरा परिवार और विप्रजनों का का आशीर्वाद मेरे लिए सबसे बड़ा सौभाग्य है। इसलिए पिछले वर्ष से मैं अपना जन्मदिन आश्रम में रहकर खेड़ापति एवं पुजारियों के आशीर्वाद की छांव में क्षेत्रवासियों के बीच मनाता हूँ।
उन्होंने आगे कहा कि - हमारे तो ग्रंथ कहते हैं कि 'बिनु हरि कृपा मिले नहीं संता' तो हरि की कृपा से अगर पूज्य जनों का आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है तो उससे भला क्यों अछूता रहूँ। क्षेत्र की जनता का मेरे ऊपर जो स्नेह है वह भी ईश्वरीय कृपा ही है। मेरी ईश्वर से यही प्रार्थना है कि जिस तरह विधानसभा परिवार के लोग निरंतर मुझे स्नेहाशीष देते हैं, मैं भी उनकी सेवा और सुविधा के कार्य सदैव करता रहूँ।
: कुंडलपुर,इच्छा के निरोध का नाम तप कहा है,आचार्य श्री समयसागर जी महाराज
Fri, Jun 21, 2024
इच्छा के निरोध का नाम तप कहा है,आचार्य श्री समयसागर जी महाराज
कुंडलपुर दमोह। सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा शारीरिक मानसिक और आत्मिक यह तीन प्रकार की शांति है ।भूख लगती है प्यास लगती है तो उस क्षुधा पिपासा के शमन के लिए जलपान किया जाता है भोजन आदि किए जाते हैं। उसके माध्यम से कुछ क्षण के लिए शारीरिक जो भूख है वह मिट जाती है तृषा मिट जाती है। किंतु उसके बाद पुनः भूख लगती है इसके उपरांत भरपेट भोजन कर लिया मन के अनुरूप ही स्वादिष्ट भोजन किया इसके बाद भी इच्छा का निरोध नहीं हो पाता। किसी ने कहा महाराज भोजन कर लिया उसके बाद हम 2 घंटे के लिए भोजन का त्याग करते हैं तो यह तप के अंतर्गत आता है कि नहीं ।भरपेट भोजन कर लिया लगभग तीन-चार घंटे लगेंगे डाइजेस्ट होने में उसके पहले एक आध घंटे नहीं लिया तो वह तप के अंतर्गत आएगा ।तो ग्रहस्थ के तप में श्रमण के तप में अंतर क्या है ।दूसरी बात यह है भरपेट भोजन करने के उपरांत अब इच्छा तो है नहीं जब इच्छा नहीं तो इच्छा के निरोध का नाम तप कहा है ।तो निरोध किसका किया ना प्यास लग रही है ना भूख लग रही भोजन करने को बैठ गए भोजन कर लिया अंधों की टोपी चिंता बनी हुई है ।इच्छा का निरोध नहीं कर पा रहा है मानसिक इच्छा है। मन की भूख अभी भी लगी हुई है और उसके लिए वह प्रयत्न करता रहता है इसलिए तप उसको बोलते इच्छा का निरोध किया जाता जिसमें ।कई प्रकार की इच्छाएं होती हैं उनका निरोध ही किया जाता है मोक्ष की इच्छा का भी निरोध कर ले महाराज सब तैयार हो जाएंगे। हमें मोक्ष की क्या आवश्यकता क्योंकि इच्छा का निरोध तप का है। ऐसा नहीं किंतु जिन वस्तुओं के माध्यम से पाप कर्म का अर्जन होता है उसका निरोध होता है उसके संवर के लिए और पाप कर्म की निर्जरा के लिए तप किया जाता है ।वह वहिरंग तप 6 प्रकार का है अनशन अर्थात चारों प्रकार के आहार का त्याग होता है उनोदर का अर्थ भूख से कम लेना भरपेट नहीं लेना इसे उनोदर बोलते इसमें भी बहुत सारे भेद होते चले जाते। रसपरित्याग भी होता षटरस पकवान बनाकर के आप लेते तो उनोदर भी अच्छा लगता क्योंकि सरस भोजन है और नीरस भोजन है तो वह सोचता उपवास करना ही ठीक है। क्योंकि नीरस लिया नहीं जाता यह सब तप है तो अर्थ है गुरुदेव ने भी कहा था अनशन से भी महत्वपूर्ण उनोदर तप है। क्योंकि उपवास करके एकांत में बैठकर के आप स्वाध्याय में लगा सकते हैं जाप अनुष्ठान में लगा सकते हैं भगवान की स्तुति पाठ में उपयोग लगाया जा सकता है। वहां पर तो थाली देखने में नहीं आ रही है इसलिए अनशन तप आसानी से हो सकता है ।उसमें भी कठिनाई है प्रारंभ अवस्था से फिर भी उनोदर की अपेक्षा से तप सरल माना जाता है किंतु जब आप रसोई घर में पहुंच जाते हैं और थाली पर बैठ जाते हैं थाली पर बैठते ही भूख की उदीरणा होती ऐसा कहने में आता अर्थ यह है वहां पर भोजन सामग्री को देखते ही उदीरणा हो जाती है खाने की इच्छा जागृत होती उसको रोकना यह तप माना जाता ।अच्छी भूख लगी है मनचाही वस्तु वहां परोस दी गई है फिर भी मुझे एक ही ग्रास लेना है इस प्रकार संकल्प लेकर वह श्रमण आहार के लिए निकलते हैं इसको अनशन तप से भी महत्वपूर्ण माना। यह कठिन तप माना जाता और रस परित्याग इससे भी कठिन तप ।गुरुदेव का कहना था चौके में जाने के बाद थाली दिखाते हैं तो उस समय रस परित्याग करना। इसलिए कहा वहां कोई चीज दिखाई नहीं दे रही उसी का त्याग कर लेते रसगुल्ला नहीं है और कोई पकवान नहीं है तो उसका मैं आज त्याग कर लेता हूं यह रसपरित्याग नहीं माना जाता अच्छे-अच्छे व्यंजन देखकर उसी का त्याग करना चाहिए।