: धार्मिक कार्य स्वर्ग और मोक्ष का बीज है मुनिश्री
Tue, Apr 15, 2025
रिपोर्टर अनिल जैन
धार्मिक कार्य स्वर्ग और मोक्ष का बीज है मुनिश्री
बहोरीवंद
आज का वर्तमान समाज विज्ञान की प्रगति के चमत्कार को देखकर चमत्कृत है परिथ फल का आकाशी है विज्ञान व्रत एक विद्युत बल्ब की प्रकाश यात्रा पर विचार करें तो प्रथम एक सच्चाई यह है कि वायर मी खंबा केवल लाइन सब स्टेशन फिर विद्युत की दूर तक की यात्रा पश्चातज हां से सप्लाई होती है वहां पर भी अनेकों संयंत्र एक बल्ब के पीछे की प्रकाश व्यवस्था में अनेकों कारणो के पश्चात एक बल्ब प्रकाशित होता हैइसके बावजूद भीयदि सप्लाई बाधित होती है तो अंधेरा ही है यह विज्ञान हैजबकि धार्मिक कार्य का प्रतिफल ऐसा नहीं है जैन आगम के अनुसार साधु का भेष द्रव्य एवं भाव दो तरह का है यदि साधु पूर्ण शुद्ध शुद्धात्म स्वभाव वाला है तो मोक्ष सुनिश्चित है मोक्ष सुनिश्चित है ऐसे हीआपके धार्मिक कार्य हैं आपका श्रद्धा विवेक समर्पण गुरु और परमात्मा की सेवाकरते हैं उससे आपको परंपरा से मोक्ष प्राप्त होगा उक्त आशय के सारगर्भित उद्गार मुनि श्री सुधासागर जी एवं मुनि श्री प्रसाद सागर जी ने बहोरीवंद मे होने वाले पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के समापन अवसर पर श्रीजी को उच्चासन पर विराजमान किया गया तत्वस्वात प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया सानिद् में 1008 कलशो से पाशाण से परमात्मा बने भगवान शानिनाथ जी का त्रिलोक तीर्थ जिनालय मे महा मस्तिकाभिषेक तथा यागमंडल विधान के समापन पर विशिष्ट पात्रो एवं सामान्य द्वारा हवन की पूर्णाहुति की गई . कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्रीमंत सेठ उत्तमचंद जैन कोयला अनुराग जैन प्रमोदजैन काका महेन्द्र जैन मनोज जैन प्रशांत जैन सत्येन्द्र जैन डा के एल जैन प्रशांत जैन सुरेन्द्र सिंघई विनय जैन नरेन्द्र सिंघई दिनेश जैन प्रदीप जैन पुष्पेन्द्र मोदी युवामंडल महिला मंडल के सदस्यो की बडी संख्या मे उपस्थिति रही
: ज्ञान कल्याणक पर उमडी आस्था,भगवान की आहार चर्या कराने श्रद्धालुओ की रही भीड
Tue, Apr 15, 2025
रिपोर्टर अनिल जैन
ज्ञान कल्याणक पर उमडी आस्था
भगवान की आहार चर्या कराने श्रद्धालुओ की रही भीड
बहोरीबंद
भगवान आदि कुमार छै माह पश्चात आहार के लिए निकले राजा सौम और राजा श्रेयांश ने इच्छु रस का आहार नवदा भक्ति पूर्वक पडगाहन के पश्चात दिए तभी से आज तक दान तीर्थ का प्रवर्तन निरंतर चल रहा है श्रवणो को श्रावको द्वारा आहार दान की प्रक्रिया वर्तमान में आदिनाथ के काल से आज भी निरंतर प्रवाहमान है साधुओं के रत्नत्रय के पालन में ग्रहस्तों द्वारा तप वृद्धि हेतु आहार दान दिया जाता है।पंचकल्याणक के चतुर्थ दिवस आहार की चर्या विधि नायक भगवान पर की गई आदिनाथ द्वारा असी मसी कृषि विद्या शिल्प वाणिज्य आदि 72 कलाओं का उपदेश प्रजा को दिया गया अंक और अक्षर विद्या का प्रारंभ ब्राह्मी और सुंदरी को देकर किया गया आदि कुमार आहार के पश्चात वन गमन कर गए जहां घनघोर तप करते हुए आत्म ज्ञान को प्राप्त हुए यह आत्मज्ञान केवल ज्ञान का रूप धारण कर मोक्ष प्राप्त कराएगा प्रतिष्ठा महोत्सव में सभी क्रियाएं जन समुदाय के मध्य की गई।उक्त आशय के सारगर्भित उद्गार मुनिपुंगव सुधासागर जी मुनि श्री प्रसाद सागर जी ससंघ के सानिद्ध मे भगवान के ज्ञान कल्याणक महोत्सव के पावन अवसर पर विशाल धर्मसमा मे व्यक्त किये ज्ञान कल्याणकया दिवस पर प्रातःमंदिर की प्रांगण मेंचल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव कार्यक्रम में .भगवान का अभिषेक शांति धारा पूजन एवं भगवान की आहारचार्य पडगाहन आदि के कार्यक्रम शांनंद संपन्न किए गए।
: हनुमान जयंती की अवसर पर हुई प्राण प्रतिष्ठा
Tue, Apr 15, 2025
हनुमान जयंती की अवसर पर हुई प्राण प्रतिष्ठा
साईंखेड़ा सीपीए स्कूल के सामने से तूमडा जाने वाली रोड के नजदीक नकटा के पास हनुमान जयंती के अवसर पर सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर में पंडित सीता शरण जी अयोध्या वालों के सानिध्य में हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा की गई जिसमें साईं खेड़ा एवं तूमडा के अनेक भक्त उपस्थित रहे बता दें कि बहुत वर्षों पहले यहां पर एक प्राचीन मडिया बनी हुई थी जिसमें हनुमान जी विराजमान थे धीरे-धीरे वह मडिया पुरानी होकर जर्जर हो चुकी थी कुछ भक्तों ने अपने सहयोग से वहां पर एक भव्य मंदिर निर्माण कराया एवं महाबली हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा नए मंदिर में हनुमान जयंती के अवसर पर की गई एवं प्रसादी भंडारे का आयोजन भी किया गया इस आयोजन में तुमड़ा सहित कुछ साईंखेड़ा के भक्तों का सहयोग भी रहा ।