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: पुण्य सलिला माँ नर्मदे(रेवार्चन ) (14 ,12 मात्राएँ ,सम चरण तुकांत )डॉ सुशील शर्मा

Aditi News Team

Sun, Jan 29, 2023
पुण्य सलिला माँ नर्मदे(रेवार्चन ) (14 ,12 मात्राएँ ,सम चरण तुकांत )डॉ सुशील शर्मा माँ नर्मदे पुण्य सलिला , आत्म रूप विधान हो। नादमय ओंकारमय , स्वस्तिमय संधान हो।   शिव स्वेद से उत्पन्न तुम , पुण्य धन्या शिव सुता। अमरकंटक गोमुखी तुम , धन्य धारा मृदुलता।   सतपुड़ा की मेखला में , बहे जीवन दायनी। हे रूद्रांगी सम्भूता , योगिनी मन गामिनी।   फेनिल अमृतमयी धारा , सर्व शोक विनाशनी। पुष्परेखा तमस हरणी , मातु मोक्ष प्रकाशनी।   हे नर्मदा हे त्रिकूटा , रेवा विपापा मोक्षणी। आशुतोषी माँ नर्मदा , कल्प सुपोषित तीक्ष्णी।   नीलांबरा रत्नाकरी , मनप्रभा द्रुत गामिनी सर्वा पाप विनिर्मुक्ता, नीलमणि द्युति दामिनी।   धन्यधारा माँ नर्मदे , जगत का कल्याण हो। नीर ले अविराम बहती , सिंधु तक निर्याण हो।   चरण में तेरा पड़ा मैं , माँ न मुझे विसारिये। चरण रज तन मन लगा लूँ , माँ रेवा उबारिये।   *माँ नर्मदा के पावन प्रकटोत्सव "नर्मदा जंयती" की हार्दिक शुभकामनाएं।*

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