एमएसपी बढ़ाने का महत्वपूर्ण फैसला : प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट द्वारा महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय दलहन मिशन को मंजूरी,msp बढ़ाने का फैसला
Wed, Oct 1, 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट द्वारा महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय दलहन मिशन को मंजूरी, एमएसपी बढ़ाने का महत्वपूर्ण फैसला
कृषि मंत्रालय के प्रस्तावों पर किसान-हितैषी निर्णयों पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री का माना आभार
किसानों की आय, खाद्य व पोषण सुरक्षा को मजबूती, मोदी सरकार की किसानों के प्रति संवेदनशीलता- श्री शिवराज सिंह
दशहरा पूर्व, नवरात्रि की पावन बेला में पीएम ने लिए कैबिनेट में ऐतिहासिक फैसले- केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान
“राष्ट्रीय दलहन मिशन” का लक्ष्य 2030-31 तक दलहन उत्पादन 242 लाख टन से 350 लाख टन करने का- श्री चौहान
दशहरे के ठीक एक दिन पूर्व, नवरात्रि की पावन बेला में आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में दो ऐतिहासिक फैसले हुए। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि “राष्ट्रीय दलहन मिशन” को मंजूरी देने के साथ ही रबी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की गई है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के इन प्रस्तावों को मंजूरी देने पर श्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का देश के किसानों की ओर से आभार मानते हुए कहा कि ये दोनों निर्णय देश की खाद्य- पोषण सुरक्षा, किसान कल्याण व कृषि उत्पादन क्षेत्र में दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव डालने वाले हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसान-हित को सर्वोपरि मानते हुए संसाधनों व योजनाओं को समग्र रूप से जोड़ने की दिशा बनाई है, जो किसानों के प्रति मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता व संवेदनशीलता को दर्शाता है।
श्री शिवराज सिंह ने बताया कि देश में दालों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, पोषण एवं किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से “राष्ट्रीय दलहन मिशन” मंजूर किया गया है। मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 242 लाख टन से 350 लाख टन करने का है। मिशन के तहत 416 जिलों में विशेष उत्पादन एवं वृद्धि कार्यक्रम लागू होंगे। इसमें चावल के परती क्षेत्र, सर्वश्रेष्ठ प्रजनक/आधार/प्रमाणित बीज (Rice Fallow Areas, Best Breeder/Foundation/Certified Seed), इंटरक्रॉपिंग, सिंचाई, मार्केट लिंकेज, और तकनीकी सहायता को नीति में सम्मिलित किया गया है। दलहनी फसल में तूर, उड़द व मसूर की खरीद एमएसपी पर 100% होगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का पूर्ण लाभ मिले। मिशन का 2025-26 में 11,440 करोड़ रु. का बजट है।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह के अनुसार, गेहूं समेत रबी फसलों की एमएसपी में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए लागत पर 109% तक लाभ किसानों को मिलेगा। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि कैबिनेट के इन ऐतिहासिक फैसलों से किसानों की आमदनी, सामाजिक सम्मान एवं देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। सरकार, किसानों, किसानों के संगठनों और देश की जनता को विश्वास दिलाती है कि एमएसपी नीति, राष्ट्रीय दलहन मिशन और अन्य योजनाएं पूरी पारदर्शिता, वैज्ञानिकता और किसान-हित के साथ लागू होगी।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बताया कि एमएसपी में सबसे अधिक वृद्धि कुसुम्भ के लिए ₹600 प्रति क्विंटल की गई है, तत्पश्चात मसूर के लिए ₹300 प्रति क्विंटल की गई है। रेपसीड और सरसों, चना, जौ और गेहूं के लिए क्रमशः ₹250 प्रति क्विंटल, ₹225 प्रति क्विंटल, ₹170 प्रति क्विंटल और ₹160 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।
वृद्ध—समय की धरोहर : ( विश्व वृद्ध दिवस पर कविता - सुशील शर्मा)
Tue, Sep 30, 2025
वृद्ध—समय की धरोहर
( विश्व वृद्ध दिवस पर कविता - सुशील शर्मा)
समय की थाप पर झूमते कदम,
अब धीमे हो चले हैं,
किन्तु इन कदमों की थिरकन में
युगों का संगीत बसा है।
चेहरे की झुर्रियाँ
सिर्फ बुढ़ापे की निशानियाँ नहीं,
ये जीवन के युद्धों की पदक हैं,
जो अनुभवों के रक्त से अर्जित हुए।
वृद्ध
वे थके नहीं हैं,
वे थम नहीं गए हैं,
वे समाज की जड़ों में
छिपा हुआ
वह जल हैं,
जो वृक्ष को हरित बनाता है।
आज का समय
कभी-कभी उन्हें
कोनों में धकेल देता है,
अब इनका क्या काम
यह प्रश्न तलवार-सा चुभता है।
पर कौन समझे
कि वही वृद्ध
कभी पिता बनकर सीढ़ी बने थे,
माँ बनकर छाया बने थे,
जिन्होंने बच्चों की हथेलियों में
सपनों के अक्षर लिखे थे।
आज वही हाथ
काँपते हैं,
पर उनमें अब भी है
दुआओं की अथाह शक्ति।
आज वही आँखें
धुँधली हैं,
पर उनमें अब भी है
मार्गदर्शन का दीप।
समाज का भविष्य
युवाओं की ऊर्जा है,
पर उसकी दिशा
वृद्धों की स्मृति से ही निकलती है।
युवाओं की गति
आंधी हो सकती है,
पर वृद्धों की स्थिरता
पर्वत जैसी है।
आज
जब हम आधुनिकता के नाम पर
उन्हें उपेक्षित करते हैं,
तब वास्तव में हम
अपने ही अतीत को नकारते हैं।
वृद्ध
स्मृतियों की नदी हैं,
अनुभवों का पुस्तकालय हैं,
सहनशीलता का सागर हैं।
उनके बिना
समाज केवल वर्तमान होगा,
भविष्य और अतीत से विहीन।
इस विश्व वृद्ध दिवस पर
आओ प्रण करें
वृद्धों को केवल स्मृति न मानें,
बल्कि वर्तमान का सहारा भी समझें।
उनकी थकान को सम्मान दें,
उनकी हँसी को अपना उजाला मानें।
वृद्ध होना
कमज़ोर होना नहीं है,
वृद्ध होना
पूर्ण होना है
समय की यात्रा का
मुकुट पहनना है।
हम सब साठोत्तर पीढ़ी के लोग
यही कहना चाहते हैं
हमारे भीतर अब भी
सपनों की नमी है,
शरद चाँदनी-सी उजली आस्था है,
और अपनों के लिए
अनगिनत आशीषें हैं।
सुशील शर्मा